सालेह का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन, धर्म और इस्लामी शिष्टाचार आले सऊद को यमनी जनता पर अत्याचार करने से नहीं रोक सकते, इसलिए कि वहाबियों की विचारधारा ने उन्हें यमनी बच्चों के जनसंहार के लिए प्रोत्साहित किया है।
उन्होंने कहा, आले सऊद वास्तव में ज़ायोनी हैं, जो मुसलमान होने का दावा करते हैं, हालांकि वे इस्लामी शिक्षाओं से काफ़ी दूर हैं।
मानव अधिकारों के उच्चायुक्त के प्रतिनिधि का कहना था कि यमनी जनता ने लड़ाई के मोर्चे पर दुश्मन को ख़ाक चटा दी है।
उन्होंने कहा, आले सऊद अमरीका की सहायता से जंगल के क़ानून का राज चाहते हैं, अब्दुल मलिक बिन सऊद ने फ़िलिस्तीन को बेच दिया और उसकी संतान ने वहाबी-ज़ायोनी नीतियों पर चलते हुए सीरिया, इराक़ और यमन को बर्बाद कर दिया।
सालेह ने संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की बमबारी को बंद करवाने की मांग की।
इसी प्रकार उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सऊदी अरब के ख़िलाफ़ व्यवहारिक क़दम उठाना चाहिए और यमन की अत्याचार ग्रस्त जनता के घावों पर मरहम रखना चाहिए।